चित्रकूट डीपीआरओ कार्यालय बना भ्रष्टाचार का अड्डा, फर्जी कागज़ों से नौकरी और आरोपों के बाद भी कुर्सी सुरक्षित
#चित्रकूट डीपीआरओ कार्यालय बना भ्रष्टाचार का अड्डा, फर्जी कागज़ों से नौकरी और आरोपों के बाद भी कुर्सी सुरक्षित चित्रकूट जनपद चित्रकूट में जिला पंचायतराज अधिकारी कार्यालय सुर्खियों है जनपद चित्रकूट में भ्रष्टाचार का चल रहा गजब खेल,चोर चोर मौसेरे भाई की कहावत जिला पंचायतराज अधिकारी कार्यालय (DPRO) में साबित हो रही है ऐसा हम इसलिए कह रहे है क्यों कि एक कनिष्क लिपिक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहा है तो दूसरा जिसे कार्यवाही करनी है उस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप है यहां तक कि उसे चार्ज देने तक से उच्च अधिकारी ने पत्र लिखकर मना किया है बावजूद इसके पत्र को छुपाकर चार्ज पा लिया गया और अब चोर चोर मौसेरे भाई बनकर अधिकारियों के आंखों में धूल झोंक रहे है । मामला जिला पंचतराज अधिकारी कार्यालय का है जहां दो दशकों से तैनात कनिष्क लिपिक सुरेंद्र कुमार चतुर्वेदी पर फर्जी कागजों के आधार पर नौकरी पाने का गंभीर आरोप लगा है जो जिला विकास अधिकारी की जांच में कनिष्क लिपिक सुरेंद्र कुमार चतुर्वेदी दोषी पाए गए है और उन्होंने नियुक्तिकर्ता जिला पंचायतराज अधिकारी सहित उच्च अधिकारियों को जांच रिपोर्ट सौंपते हुए कार्यवाही की लिए पत्र लिखा था लेकिन एक महीने से ज्यादा का समय बीत गया और कार्यवाही ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है अब बात करते है जिला पंचायतराज अधिकारी का चार्ज संभाल रहे रमेशचंद्र गुप्त की जिनका हाल ही में अपर जिला पंचायतराज अधिकारी से प्रमोशन होकर जिला पंचायतराज अधिकारी बने है जो पद खाली होने की वजह से इनको चार्ज दे दिया गया लेकिन चार्ज लेने के पहले ही उप निदेशक ( पंचायत ) चित्रकूटधाम मंडल बांदा परवेज आलम खां ने पंचायती राज निदेशक और जिलाधिकारी चित्रकूट को पत्र लिखकर अपर जिला पंचायतराज अधिकारी रमेश चंद्र गुप्त को चित्रकूट का चार्ज देने से मना किया था और उनपर आरोप लगाया कि रमेश चंद्र गुप्त की छवि अच्छी नहीं है और उनपर सचिवों और सफाई कर्मियों से अवैध वसूली की लगातार शिकायते मिल रही है इसके साथ ही 2021 में पंचायतों के सामान्य निर्वाचन के समय सहायक विकास अधिकारी के रूप में निर्वाचन अवधि में प्रशासक रहते हुए कई करोड़ रुपए आहरण किया गया था जिसकी शिकायत निदेशालय स्तर पर भी की गई थी जो चित्रकूट में तैनाती के दौरान एक बार निलंबित भी हुए थे जो अब जिला पंचायतराज अधिकारी का चार्ज देना उचित नहीं है बावजूद इन सभी तथ्यों को दरकिनार करते हुए चोर चोर मौसेरे भाईयों ने इस पत्र को छिपाते हुए जिलाधिकारी को गुमराह कर खाली कुर्सी का फायदा उठाते हुए चार्ज ले लिया जो एक बार फिर से चोर चोर मौसेरे भाई का फर्ज निभाते हुए एक दूसरे को बचाने में जुए है जो कनिष्क लिपिक सुरेंद्र कुमार चतुर्वेदी पर नियुक्तिकर्ता जिला पंचायतराज अधिकारी कार्यवाही की फाइल दबाए हुए बैठे है जिसको लेकर आज एक शिकायतकर्ता सीताराम कश्यप ने संसदीय अध्ययन समिति के माननीय सभापति सहित जिले के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर दोनों चोर चोर मौसेरे भाईयों पर कार्यवाही करने की मांग किया है । अब सवाल उठता है कि जिनपर भ्रष्टाचार और फर्जी कागजों के सहारे नौकरी करने के आरोप ही नहीं बल्कि जांच में दोषी पाए गए है तो आखिर कार्यवाही क्यों नहीं ? आखिर इस भ्रष्ट तंत्र में सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति कैसे सफल होगी ।
रिपोर्ट
देवीदयाल राजपूत

