गौरेला पेंड्रा मरवाहीछत्तीसगढ़

*गौरेला पेंड्रा मरवाही* *धान खरीदी केंद्र में खुला लूट का अड्डा!* *देवरी कला केंद्र में किसानों से अवैध वसूली का वीडियो वायरल, जांच में पुष्टि के बाद भी FIR पर सस्पेंस*

स्टेट हेड महेन्द्र सोनवानी की रिपोर्ट।

*गौरेला–पेंड्रा–मरवाही।* प्रदेश में सुशासन का दावा करने वाली सरकार के निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले के देवरी कला धान खरीदी केंद्र में किसानों से खुलेआम अवैध वसूली किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति किसानों से जबरन पैसे वसूलते हुए साफ नजर आ रहा है !वीडियो सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि धान खरीदी केंद्र किसानों की सेवा का नहीं, बल्कि लूट और उगाही का अड्डा बन चुका था।

 

आरोप है कि आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित देवरी कला (पेंड्रा) के समिति प्रबंधन चंद्रकांत सलाम ने एक पूरा सिंडिकेट खड़ा कर बाहरी व्यक्ति को केंद्र में बैठाया और किसानों से अवैध वसूली करवाई। वायरल वीडियो में कोटमी निवासी विकास गुप्ता उर्फ विक्की किसानों से खुलेआम पैसे लेते हुए दिखाई दे रहा है। यह दृश्य सरकार और प्रशासन दोनों के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

 

*जांच में आरोप सही, फिर FIR क्यों नहीं?*

 

सूत्रों के अनुसार, वीडियो जिला प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार सकोला, फूड इंस्पेक्टर और सहकारिता विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने देवरी कला केंद्र में जांच की। जांच के दौरान अवैध वसूली की पुष्टि होना सही पाई गई है। इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जांच में अपराध साबित हो चुका है, तो अब तक FIR क्यों दर्ज नहीं की गई?

 

*क्या प्रशासन किसी दबाव में है या फिर दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है?*

 

*खानापूर्ति होगी या पूरे सिंडिकेट पर गिरेगी गाज?*

 

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस सिंडिकेट के जरिए किसानों से अब तक लाखों रुपये की अवैध वसूली की जा चुकी है। अब देखना यह है कि कार्रवाई केवल वीडियो में नजर आ रहे व्यक्ति तक सीमित रहेगी या फिर समिति प्रबंधन, संरक्षण देने वाले अधिकारी और पूरे नेटवर्क पर भी कानून का शिकंजा कसेगा।

 

किसानों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका साफ कहना है कि यदि दोषियों पर जल्द से जल्द कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

*अब पूरा जिला यह जानना चाहता है कि FIR कब दर्ज होगी?* किस-किस का नाम उसमें होगा? और क्या किसानों से लूट करने वालों को सच में सजा मिलेगी या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

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