गौरेला पेंड्रा मरवाहीछत्तीसगढ़

*जुआ-सट्टा पर आंदोलन और कांग्रेस नेता की गिरफ्तारी से मचा सियासी भूचाल*

 

 

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही

जिले में जुआ और सट्टा को लेकर मची राजनीतिक हलचल अब विस्फोटक मोड़ पर पहुंच चुकी है। जिस मुद्दे पर कांग्रेस और युवा कांग्रेस सड़कों पर उतरकर प्रशासन को घेर रही थी, उसी मुद्दे ने अब कांग्रेस को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। *वजह है — आदिवासी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विशाल सिंह उरेती का जुआ खेलते हुए पुलिस के हत्थे चढ़ जाना।*

 

कुछ दिन पहले ही जिला युवा कांग्रेस के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया गया था। प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष आकाश शर्मा और जिला अध्यक्ष अमन शर्मा की अगुवाई में हुए इस प्रदर्शन में जिले में फल-फूल रहे जुआ-सट्टा कारोबार को पूरी तरह बंद करने की मांग उठाई गई थी। मंच से चेतावनी दी गई थी कि यदि 15 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र होगा।

इसी आंदोलन के बाद मरवाही पुलिस ने दानी कुंडी क्षेत्र में छापा मारकर 11 लोगों को जुआ खेलते हुए गिरफ्तार किया। लेकिन इस कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला नाम सामने आया — *विशाल सिंह उरेती, जो कांग्रेस के आदिवासी संगठन का जिला अध्यक्ष* है। यही वह नाम है जिसने पूरे जिले की राजनीति में आग लगा दी है।

 

*कथनी और करनी की टकराहट*

 

कांग्रेस एक तरफ सट्टा-जुआ बंद करने की मांग को लेकर प्रशासन को घेर रही थी और दूसरी तरफ उसी पार्टी का एक वरिष्ठ जिला स्तरीय नेता जुआ खेलते पकड़ा जा रहा है। यह सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि कांग्रेस की राजनीति पर सीधा सवाल बन गया है। आम जनता अब पूछ रही है कि क्या कांग्रेस का *आंदोलन ईमानदार था या यह सिर्फ राजनीतिक ड्रामा था?*

 

जिस दिन युवा कांग्रेस कलेक्टर कार्यालय के बाहर नारे लगा रही थी, उसी समय पार्टी के भीतर ही जुआ खेला जा रहा था — यह विरोधाभास कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर रहा है।

*₹4.52 लाख की जुआ सामग्री और पुलिस की कार्रवाई*

 

मरवाही पुलिस ने मौके से नकद राशि, 6 मोटरसाइकिल और 11 मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिनकी कुल कीमत करीब ₹4.52 लाख बताई जा रही है। सभी 11 आरोपियों पर छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022 के तहत केस दर्ज किया गया है।

लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा अब कानून से ज्यादा इस बात पर है कि क्या यह कार्रवाई कांग्रेस के आंदोलन के दबाव में हुई या फिर यह पहले से चल रही जांच का हिस्सा थी।

 

*आदिवासी समाज और कांग्रेस की साख पर असर*

 

विशाल सिंह उरेती सिर्फ एक नेता नहीं बल्कि आदिवासी कांग्रेस का जिला अध्यक्ष है। ऐसे पद पर बैठे व्यक्ति का जुआ खेलते पकड़ा जाना आदिवासी समाज के लिए भी शर्मिंदगी का विषय बन गया है। कांग्रेस जिस नैतिक राजनीति का दावा करती है, उस पर यह गिरफ्तारी बड़ा धब्बा बनकर उभरी है।

अब विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है और कांग्रेस के भीतर भी इस मामले को लेकर असहजता साफ नजर आ रही है।

 

*”राजनीतिक तूफान तय*

 

जुआ-सट्टा विरोधी आंदोलन के बीच कांग्रेस नेता की गिरफ्तारी ने जिले की राजनीति को झकझोर दिया है। यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है। कांग्रेस को अब जवाब देना होगा कि वह अपराध के खिलाफ है या अपने ही नेताओं को बचाने में लगी है।

मरवाही से लेकर रायपुर तक इस घटना की गूंज सुनाई देने लगी है — और साफ है कि यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि कांग्रेस की राजनीति के लिए एक बड़ा इम्तिहान बन चुका है।

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