प्रभास गिरी पर्वत: जैन–हिंदू आस्था का संगम, मकर संक्रांति पर उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब।*

प्रभास गिरी पर्वत: जैन–हिंदू आस्था का संगम, मकर संक्रांति पर उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब।
कौशाम्बी/प्रयागराज से लगभग 60 किलोमीटर दूर कौशाम्बी जनपद के पभोसा गांव में यमुना नदी के तट पर स्थित प्रभास गिरी पर्वत जैन और हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण भी जिले की विशिष्ट पहचान बन चुका है।
जैन धर्म के छठवें तीर्थंकर से जुड़ी पावन भूमि जैन धर्म की मान्यताओं के अनुसार प्रभास गिरी पर्वत वह स्थान है, जहां छठवें तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभु ने दीक्षा लेकर कठोर तपस्या की और केवलज्ञान प्राप्त किया था। इसी कारण यह स्थान दिगंबर जैन समाज के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।
पर्वत की चोटी तक पहुंचने के लिए लगभग।
180 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। शिखर पर पहुंचने पर श्रद्धालुओं को प्राचीन जैन प्रतिमाओं के दर्शन होते हैं। यहां वर्तमान में सात जैन मंदिर और एक विशाल मान स्तंभ स्थापित है। मान्यता है कि मान स्तंभ के दर्शन से व्यक्ति के भीतर का अहंकार, क्रोध और नकारात्मक भाव समाप्त होते हैं।हिंदू श्रद्धालुओं की भी गहरी आस्था
स्थानीय जनश्रुतियों और परंपराओं के अनुसार यह क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण की अंतिम लीलाओं से भी जुड़ा माना जाता है। इसी कारण यहां हिंदू श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। पर्वत और आसपास का क्षेत्र वर्षों से धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है।
14 जनवरी को मकर संक्रांति का विशाल मेला।
हर वर्ष की तरह इस बार भी 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर प्रभास गिरी पर्वत और यमुना तट पर भव्य धार्मिक मेले का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश समेत आसपास के जिलों और राज्यों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालु यमुना नदी में स्नान कर प्रभास गिरी पर्वत पर दर्शन-पूजन करते हैं और पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।मेले को लेकर स्थानीय ग्राम पंचायत और प्रशासन द्वारा तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं सहित अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षण।
प्रभास गिरी पर्वत प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। पर्वत की ऊंचाई से यमुना नदी का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। चारों ओर फैली हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों और श्रद्धालुओं दोनों को मानसिक शांति प्रदान करता है।
धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह स्थल अब धीरे-धीरे पर्यटन केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है।
सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक।
प्रभास गिरी पर्वत जैन और हिंदू परंपराओं के शांतिपूर्ण संगम का प्रतीक है। यह स्थल न केवल धार्मिक सद्भाव को दर्शाता है, बल्कि कौशाम्बी जिले की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को भी सशक्त करता है।मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाला यह मेला एक बार फिर प्रभास गिरी पर्वत को श्रद्धा, भक्ति और आस्था के विराट केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।




