गौरेला पेंड्रा मरवाहीछत्तीसगढ़

सुशासन शर्मिंदा : – पत्रकार पर जानलेवा हमला, फिर 48 घंटे बाद काउंटर FIR का खेल… सवाल क्या कानून अब माफिया के इशारों पर चलेगा? 

स्टेट हेड महेन्द्र सोनवानी की रिपोर्ट।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/अमरकंटक : – मैकल पर्वत क्षेत्र में अवैध खनन, ब्लास्टिंग और स्टोन-क्रशर के खिलाफ वर्षों से रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार पर 8 जनवरी की रात जानलेवा हमला हुआ। घटना का वीडियो साक्ष्य मौजूद है, आरोपी कथित तौर पर पहचान में हैं, FIR भी दर्ज है लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी वारदात के बाद भी गिरफ्तारी और जप्ती क्यों नहीं हुई?

 

इधर दूसरी तरफ, हमले के बाद सिस्टम में जो सबसे घटिया मोड़ सामने आया है, वह है झूठी/काउंटर FIR का खेल। सूत्रों के अनुसार पत्रकार पर दबाव बनाने और मामले की धार को कुंद करने के लिए 48 घंटे बाद एक महिला शिकायतकर्ता को थाने भेजा गया और उसी के आधार पर बिना प्राथमिक जांच केस दर्ज कर लिया गया।

 

48 घंटे बाद शिकायत… और 48 मिनट की भी जांच नहीं? –

सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि घटना के बाद करीब 48 घंटे बीतने के बाद महिला शिकायत लेकर पहुंचती है, और पुलिस ने कथित तौर पर 48 मिनट की भी स्वतंत्र जांच/सत्यापन किए बिना FIR दर्ज कर दी।

यानी एक तरफ पत्रकार पर हमला हुआ, वहां सबूत होने के बावजूद कार्रवाई शिथिल और दूसरी तरफ काउंटर शिकायत पर बिजली जैसी रफ्तार!

 

थाना लेवल पर मैनेजमेंट? –

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि थाना स्तर पर बड़े लेन-देन के बाद झूठा प्रकरण दर्ज किया गया।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घटनाक्रम जिस तरह से आगे बढ़ा है, उसने जनता के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या कानून की किताब अब सौदेबाज़ी की डायरी में बदल दी गई है?

 

माफिया का संदेश हम मध्यप्रदेश के प्रभावशाली हैं –

यही नहीं, मामले में मध्यप्रदेश पक्ष में भी पत्रकार के खिलाफ FIR दर्ज कराए जाने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह FIR इसलिए कराई गई क्योंकि आरोपी पक्ष स्वयं को मध्यप्रदेश में प्रभावशाली मानता है और उसे भरोसा है कि सीमा का फायदा उठाकर वह जांच को उलझा देगा। यानी हमला एक तरफ, और दूसरी तरफ राजनीतिक/प्रभाव का कवच यह वही पैटर्न है जिसमें पीड़ित को ही अपराधी बनाने की कोशिश होती है।

 

सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं, सिस्टम की रीढ़ का है –

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अगर पत्रकार पर हमला करने वाले खुले घूमते रहें, और उल्टा पत्रकार पर ही काउंटर केस लाद दिए जाएं तो समाज में संदेश जाएगा कि यहाँ न्याय नहीं, नेटवर्क काम करता है। अब मांग उठ रही है कि इस प्रकरण में SIT/वरिष्ठ अधिकारी स्तर से जांच हो

 

दोनों राज्यों (MP-CG) के बीच समन्वित कार्रवाई हो –

झूठी FIR/काउंटर केस की स्वतंत्र जांच हो

और थाना स्तर पर यदि अनियमितता हुई है तो जिम्मेदारी तय की जाए क्योंकि मैकल सिर्फ पहाड़ नहीं यह नर्मदा की उद्गम भूमि, आस्था और पर्यावरण की रीढ़ है। और अगर यहां माफिया जीत गया, तो हार सिर्फ एक पत्रकार की नहीं कानून की होगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!