आवाज आयुर्वेद संगठन के नेतृत्व में विदेशी मेहमानों को भारतीय आयुर्वेद की समग्र एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से कराया गया परिचित।



स्टेट हेड महेन्द्र सोनवानी की रिपोर्ट।
जी पी एम//आवाज आयुर्वेद संगठन के नेतृत्व में इंग्लैंड से आए विदेशी मेहमानों को भारतीय आयुर्वेद की समग्र एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से परिचित कराया गया। इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य विदेशी अतिथियों को आयुर्वेद, पंचकर्म, वेलनेस एवं डिटॉक्सिफिकेशन प्रणाली के वास्तविक स्वरूप से अवगत कराना था।
इस अवसर पर मेहमानों को आयुर्वेद के मूल सिद्धांत, दोष-धातु-मल संतुलन, औषधीय पौधों (औषधि पदप), स्थानीय जड़ी-बूटियों एवं पारंपरिक उपचार पद्धतियों की विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि आयुर्वेद केवल रोग उपचार नहीं बल्कि “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्” की जीवन शैली है।
पंचकर्म एवं वेलनेस उपचार
कार्यक्रम के अंतर्गत शासकीय आयुर्वेद औषधालय, बस्ती बगरा में विदेशी मेहमानों को निम्न उपचार प्रदान किए गए –
अभ्यंग (Abhyanga Therapy) – औषधीय तेलों से मालिश, जिससे स्फूर्ति एवं स्नायु तंत्र को शांति मिलती है।
नाड़ी स्वेदन (Nadi Swedan) – औषधीय भाप द्वारा स्वेदन, जिससे शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं।
कपिंग थेरेपी (Cupping Therapy) – रक्तसंचार को बेहतर करने एवं दर्द निवारण हेतु पारंपरिक विधि।
पंचकर्म डिटॉक्सिफिकेशन पद्धति की जानकारी – शरीर शुद्धि एवं संतुलन की वैज्ञानिक प्रक्रिया।
उपचार के पश्चात इंग्लैंड से आए अतिथियों ने स्वयं को अत्यंत हल्का, ऊर्जावान एवं तनावमुक्त महसूस किया। उन्होंने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को “पूर्णतः प्राकृतिक, सुरक्षित एवं प्रभावी” बताया तथा इसकी सराहना की।
विदेशी मेहमानों ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में आयुर्वेद जैसी प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भविष्य में पुनः भारत आकर विस्तृत पंचकर्म उपचार लेने की इच्छा भी व्यक्त की।
यह कार्यक्रम न केवल आयुर्वेद के वैश्विक प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह दर्शाता है कि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति विश्व स्तर पर तेजी से स्वीकार्यता प्राप्त कर रही है।
आवाज आयुर्वेद संगठन द्वारा इस प्रकार के प्रयास आयुर्वेद को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने एवं विदेशी मेहमानों को भारतीय चिकित्सा संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।




