गौरेला पेंड्रा मरवाहीछत्तीसगढ़

*मुख्यमंत्री जनशिकायत पोर्टल में शिकायत के बाद गरमाया मामला: कोटमी में शराब तस्करी, अब चौकी प्रभारी पर संगीन आरोप — क्या संरक्षण में चल रहा था खेल?* *कोटमी में शराब तस्करी, अब चौकी प्रभारी पर शिकायत — क्या संरक्षण में चल रहा था खेल?*

स्टेट हेड महेन्द्र सोनवानी की रिपोर्ट।

पेंड्रा | गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला
पिछले वर्ष 31 दिसंबर 2025 की रात कोटमी इलाके में आबकारी विभाग की कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी थी। कोटमी कला स्थित “पैराडाइज डेली नीड्स” दुकान से मध्यप्रदेश निर्मित 14 पेटी अवैध शराब जब्त की गई। मुख्य आरोपी राजेश शर्मा उर्फ बबलू फरार बताया गया, जबकि एक सह-आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

कार्रवाई शिकायतों और विशेष इनपुट के आधार पर हुई। लेकिन असली सवाल कार्रवाई के बाद खड़ा हुआ — कोटमी बस स्टैंड जैसे व्यस्त और प्रमुख इलाके में, एक डेली नीड्स दुकान की आड़ में खुलेआम अवैध शराब की बिक्री चल रही थी और स्थानीय पुलिस की ओर से पहले कोई ठोस कार्रवाई सामने क्यों नहीं आई?

*पुरानी घटना, पर गहरे सवाल*

यह घटना महीनों पुरानी जरूर है, लेकिन इसके बाद चौकी प्रभारी की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठते रहे। क्षेत्र में चर्चा रही कि जब इतना बड़ा नेटवर्क सक्रिय था तो क्या स्थानीय चौकी को इसकी जानकारी नहीं थी? अगर थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

क्या *यह सिर्फ लापरवाही थी — या फिर कहीं न कहीं संरक्षण की आशंका को बल मिलता है?*

*अब सीधे और संगीन आरोप*

मामले ने और गंभीर मोड़ ले लिया। कोटमी चौकी प्रभारी अजय कुमार वारे के खिलाफ मुख्यमंत्री जनशिकायत पोर्टल में अलग से शिकायत दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप है कि उन्होंने एक आवेदक के साथ अभद्र व्यवहार किया और पद की गरिमा के विपरीत आचरण किया।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कथित घटना का साक्ष्य चौकी परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज में मौजूद है। आवेदक का दावा है कि फुटेज इस बात की गवाही देता है कि मामला केवल आरोप तक सीमित नहीं है।

यदि शिकायत में किया गया दावा सही पाया जाता है, तो यह सिर्फ अनुशासनहीनता का मामला नहीं, बल्कि वर्दी की गरिमा और पुलिस व्यवस्था की साख पर सीधा प्रश्न है।

फिलहाल मामला जांच के अधीन बताया जा रहा है।

तीखे और सीधे सवाल
• जब बस स्टैंड क्षेत्र में अवैध शराब का नेटवर्क सक्रिय था, क्या चौकी को इसकी जानकारी नहीं थी?
• यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
• क्या यह महज लापरवाही थी या संरक्षण की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता?
• एक पुलिस अधिकारी द्वारा कथित अभद्र आचरण कितना निंदनीय और शर्मनाक है?
• यदि सीसीटीवी फुटेज जांच में आरोपों की पुष्टि करता है, तो जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी को उसी पद पर बनाए रखना क्या प्रशासनिक दृष्टि से उचित है?

*जवाबदेही तय होगी या नहीं?*

आबकारी विभाग ने अंतर्राज्यीय शराब नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया, लेकिन स्थानीय पुलिस की भूमिका अब स्वाभाविक रूप से जांच के दायरे में आ रही है।

चौकी प्रभारी के खिलाफ पहले से उठे सवाल और अब मुख्यमंत्री पोर्टल में दर्ज शिकायत — दोनों मिलकर प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।

यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि अभी तक किसी भी प्रकार की संलिप्तता या दोष सिद्ध नहीं हुआ है। अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

लेकिन घटनाओं की यह श्रृंखला कोटमी चौकी की कार्यप्रणाली पर गहरी शंका जरूर पैदा कर रही है। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं — क्या निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होगी, या फिर सवाल यूं ही हवा में तैरते रहेंगे?

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