

स्टेट हेड महेन्द्र सोनवानी की रिपोर्ट।
रायपुर, 28 फरवरी 2026।
जिला पंचायत रायपुर, छत्तीसगढ़ बर्ड एंड वाइल्डलाइफ ग्रुप तथा फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के संयुक्त तत्वावधान में आज “आर्द्रभूमि संरक्षण में गाँवों की भूमिका एवं पर्यटन सह आजीविका के अवसर” विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन समुदाय प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र, छेरिखेड़ी (रायपुर) में किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कुमार विश्वरंजन उपस्थित रहे। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के पक्षी विशेषज्ञ श्री मोहित साहू, श्री जागेश्वर वर्मा एवं श्री सोनू अरोरा ने मुख्य वक्ता के रूप में आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिक महत्व, प्रवासी पक्षियों के संरक्षण तथा ग्रामीण सहभागिता पर विस्तृत जानकारी दी।
कार्यशाला में आरंग, अभनपुर, धरसीवां एवं तिल्दा विकासखंडों से बिहान महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य, ग्राम पंचायतों के रोजगार सहायक, सचिव, मेट एवं तकनीकी सहायकों सहित लगभग 60 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
वक्ताओं ने बताया कि छत्तीसगढ़ में प्रतिवर्ष 150 से अधिक विदेशी एवं प्रवासी पक्षी शीत, ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु में आते हैं, जिनके लिए प्रदेश की आर्द्रभूमियाँ महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराती हैं। आर्द्रभूमियों का संरक्षण वनों एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जितना ही आवश्यक है।
कार्यक्रम में मनरेगा के अंतर्गत तालाब, डबरी एवं पोखरों के विकास कार्यों की योजना प्रकृति-संवेदनशील दृष्टिकोण से तैयार करने पर जोर दिया गया। साथ ही पक्षी गणना एवं पक्षी दर्शन हेतु आने वाले पर्यटकों की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए रायपुर जिले के तालाबों को प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने पर चर्चा की गई, जिससे ग्रामीणों के लिए नए आजीविका अवसर सृजित हों तथा पंचायत स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिले।
कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों द्वारा आर्द्रभूमि संरक्षण एवं सतत विकास के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के संकल्प के साथ हुआ।




