चित्रकूट में ‘गौशाला घोटाला’? कागजों में भूसा, जमीनी हकीकत में सन्नाटा* *रामनगर विकासखंड की ग्राम पंचायतों में फर्जी सप्लाई का आरोप, बिना स्टॉक और गोदाम के लाखों का भुगतान*

*चित्रकूट में ‘गौशाला घोटाला’? कागजों में भूसा, जमीनी हकीकत में सन्नाटा*
*रामनगर विकासखंड की ग्राम पंचायतों में फर्जी सप्लाई का आरोप, बिना स्टॉक और गोदाम के लाखों का भुगतान*
चित्रकूट जनपद का रामनगर विकासखंड इस समय गंभीर आरोपों के घेरे में है, जहां गौशालाओं के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका सामने आ रही है। आरोप है कि भूसा सप्लाई के नाम पर कागजों में खेल रचकर ग्राम पंचायतों से लाखों रुपये का भुगतान कराया जा रहा है।
जमीनी स्तर पर पड़ताल में जो तस्वीर सामने आ रही है, वह चौंकाने वाली बताई जा रही है। जिन सप्लायरों के नाम पर भूसा सप्लाई दिखाया गया है, उनके पास न तो कोई वास्तविक स्टॉक मौजूद है और न ही भंडारण के लिए गोदाम। इसके बावजूद भुगतान की प्रक्रिया लगातार जारी रहने के आरोप हैं।
सूत्र बताते हैं कि रामनगर विकासखंड की अधिकांश ग्राम पंचायतों में अलग-अलग सप्लायरों के नाम पर बिल लगाए जा रहे हैं, लेकिन सप्लाई का कोई ठोस प्रमाण मौके पर नहीं मिल रहा। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि पूरा खेल कागजी लेन-देन के जरिए किया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर ( कई) फर्मों के नाम सामने आ रहे हैं, जिन पर फर्जी बिलिंग के जरिए भुगतान कराने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने मामले को गंभीर बना दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब न भूसा दिखाई दे रहा है और न ही कोई स्टॉक, तो आखिर सरकारी धन किस आधार पर जारी किया गया। क्या कागजों में ही गौशालाएं चल रही हैं? और अगर ऐसा है, तो जिम्मेदार कौन है?
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अब तक न तो व्यापक जांच कराई गई और न ही किसी जिम्मेदार के खिलाफ ठोस कार्रवाई सामने आई है।
(*वहीं जब इस सम्बन्ध में खंड विकास अधिकारी रामनगर राजेश तिवारी जी से जानकारी ली तो उन्होंने इस विषय पर साफ पल्ला झाड़ दिए*)
*गौशालाओं के नाम पर चल रहे इस कथित खेल ने अब प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।*
*अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।*
