चित्रकूट

चित्रकूट के चकौंध ग्राम में आवारा मवेशी किसानो की फसल कर रहे चौपट आखिर ये कौन-सा रामराज्य का अमृतकाल है..जिसमें टैक्सपेयरों की गाढ़ी कमाई को प्रधान सचिव और अधिकारी मिलकर लूट रहे है..और गरीब किसानों की फसल को गौशाला के अन्ना आवारा सांड चट कर रहे है”

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*”आखिर ये कौन-सा रामराज्य का अमृतकाल है..जिसमें टैक्सपेयरों की गाढ़ी कमाई को प्रधान सचिव और अधिकारी मिलकर लूट रहे है..और गरीब किसानों की फसल को गौशाला के अन्ना आवारा सांड चट कर रहे है”.??*

*👉जैसा कि..आप सबको पता ही है..गांव में दो अन्ना आवारा सांड मरवा साइड के किसानों का जीना मुहाल किए है..किसान इस भीषण ठंड में भी..जब कोई रजाई और आग छोड़ने के लिए तैयार नहीं है..उस पीरियड में भी..धंधेबाज जबरजस्ती प्रधान और फर्जी रिपोर्ट लगाकर शिकायत निपेक्षित करने में माहिर सचिव–श्रीमती गायत्री पाण्डेय की..जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने वाली पॉलिसी की बदौलत..अपने खेतों की रखवाली करने को मजबूर है.?*
*👉इस समस्या के निराकरण हेतु..मैने एक शिकायत ऑन लाइन दर्ज कराई थी..जिसमें सचिव साहिबा द्वारा..ये लिखते हुए कि.. कोई भी अन्ना गौवंश गौशाला के बाहर ही नहीं है कि..फर्जी रिपोर्ट लगाकर शिकायत को निपटा दिया गया है..जबकि गौशाला गौपालक मजदूरों द्वारा बिल्कुल स्पष्ट रूप से बयान दिया गया है कि..ये अन्ना आवारा सांड चकौंध गौशाला के ही है..और गौशाला में संरक्षित भी किए गए थे..लेकिन तार फाड़के निकल गए है..एवं उनके कानों में लगे टैग चीख-चीख कर ये गवाही दे रहे है कि..हम चकौंध गौशाला के है..लेकिन जबरजस्ती प्रधान और उसकी सचिव..ये मानने के लिए तैयार ही नहीं है कि..ये अन्ना आवार उनकी गौशाला के है.?*

*👉इस समस्या के सम्बन्ध में 23/12/25 को मैने एक शिकायत श्रीमान जिलाधिकारी महोदय से मिलकर की थी..जिसमें दस दिनों के बाद..कल 02/01/26 को प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी पहाड़ी श्री वीरेन्द्र सिंह जी..अन्ना आवारा सांडों को पकड़वाकर बंधवाने के लिए गांव पधारे थे..तथा इनको पकड़ने के लिए आदमियों की व्यवस्था करने के लिए और मौके पर आने के लिए..जबरजस्ती प्रधान को कई बार फोन किया..मगर उसने कोई रिस्पांस नहीं लिया..श्रीमान डाक्टर साहब यदि वो इतना ही रिस्पांसबल प्रधान होता तो..हमको इतनी बार शिकायत और इस भीषण ठंड में रात-दिन खेतों की रखवाली करने के लिए न मजबूर होना पड़ता..खैर कोई बात नहीं..लेकिन एक बात आप बिल्कुल सही बोले हैं कि..डिस्पोजल प्रधान तो हमने ही चुना है..तभी तो जबरजस्ती प्रधान यहां पूर्ण आजादी के साथ जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने वाला धंधा खोले है.?*

*👉बाकी इतना जान लीजिए कि..जितने लोग भी गौशाला संचालन में इनवाल्व है..और उनके नाम पर मिलने वाला 1500 सौ रुपए प्रति जानवर..सिर्फ और सिर्फ पैरा खिलाकर नहीं सिर्फ चटाकर..खा रहे हो..और किसान इस भीषण ठंड में भी रातदिन खेतों की रखवाली करने को मजबूर है.?उसको आंकड़ों पर चलने वाली..खत्म डीजल के साथ खड़ी..डबल इंजन सरकार तो पार्मिटेटेड करेगी..मगर ईश्वर कभी माफ नहीं करेगा.?*

*👉बाकी यदि फर्जी रिपोर्ट लगाकर..शिकायत निपेक्षित करने का सर्वाधिकार तुम्हारे पास सुरक्षित है तो..मेरे पास बार-बार शिकायत करने का सर्वाधिकार सुरक्षित है..विथ प्रूफ फिर से..सोमवार को डीएम साहब से मुलाकात करके शिकायत करूंगा..अन्यथा जो-जो लोग..गौवंश भरण पोषण के लिए मिलने वाली धनराशि को..अपने पप्पा का मॉल समझते हुए खाकर डकार रहे..वो लोग आपस में चंदा करके..मजदूरों की व्यवस्था करें और उनको पकड़कर गौशाला में संरक्षित करवाने का कष्ट करें..शेष चकौंध ग्राम पंचायत में..डिस्पोजल प्रधान की कृपा से जबरजस्ती प्रधान बने..धंधेबाज प्रधान को इससे दूर रखा जाए..क्योंकि वो सिर्फ और सिर्फ जनता की गाढ़ी कमाई को ठिकाने लगाने के लिए ही जबरजस्ती प्रधान बना है..क्योंकि इसी धंधे की कमाई से उसकी पेट रोटी और परिवार पल रहा है..और कहते भी है कि..किसी की पीठ में लात मारो..मगर किसी के पेट में नहीं.और अभी हाल फिलहाल वो अपने अपने धंधे की अगली कड़ी में..पुरानी प्राइमरी स्कूल की बिल्डिंग से निकले ईंटों और रॉ मैटेरियल को वही ठिकाने लगाकर..जनता की गाढ़ी कमाई को ठिकाने लगाने की व्यवस्था में व्यस्त है.?बाकी उसकी कोई कानूनी जवाबदेही/जिम्मेदारी नहीं है..जब भी कोई फंसने वाला मैटर आयेगा..उसके पास सीधे-सीधे एक लाइन का जवाब है..मै प्रधान थोड़े हूं..मतलब आम खायें अमवा वाले और डांड भरे पुनाहुर वाले..यानि पैरा चटाकर गौवंश भरण पोषण के लिए मिली धनराशि को खाओ तुम और आवारा सांड फसल खायें हमारी..वाह रे रामराज्य का अमृतकाल.?*

 

देवीदयाल

चित्रकूट ब्यूरो चीफ

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