कोरबाछत्तीसगढ़

अहिरन नदी पर रेत माफियाओं का कब्जा! दिन-रात हो रहा अवैध उत्खनन, खनिज विभाग की चुप्पी से उठे बड़े सवाल मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र में बेखौफ चल रहा रेत का काला कारोबार ।

 

 

 

 

NM भारत न्यूज।

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा।

पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत तुमान और अमलडीहा क्षेत्र में अहिरन नदी इन दिनों रेत माफियाओं के निशाने पर है। नदी की सीना चीरकर बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन का खेल खुलेआम जारी है। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों की मानें तो क्षेत्र में दिन-रात ट्रैक्टर और भारी वाहनों के जरिए रेत निकालकर रेलवे निर्माण कार्यों में सप्लाई की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा हुआ है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अवैध रेत परिवहन मुख्य मार्गों और रेलवे साइटों तक खुलेआम पहुंच रहा है, तब आखिर खनिज विभाग कटघोरा को इसकी भनक क्यों नहीं लग रही? या फिर सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई से परहेज किया जा रहा है? यही वजह है कि अब लोगों के बीच विभाग की भूमिका को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि तुमान और अमलडीहा क्षेत्र के कुछ रसूखदार रेत कारोबारियों द्वारा इस पूरे नेटवर्क को संचालित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि नदी से लगातार मशीनों और वाहनों के जरिए रेत निकाली जा रही है, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर जलस्तर, पर्यावरण और आसपास की खेती पर भी पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात से पहले जिस तरह नदी की गहराई और किनारों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, उससे गांवों के सामने भविष्य में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

प्रदेश के मुख्यमंत्रीश्री विष्णु देव साय जी अवैध उत्खनन और खनिज तस्करी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं। सरकार लगातार राजस्व चोरी रोकने और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की बात कर रही है, लेकिन पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र की स्थिति सरकार के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।

क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि बिना राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर अवैध उत्खनन संभव नहीं हो सकता। रेत माफियाओं के बेखौफ अंदाज को देखकर लोगों का कहना है कि उन्हें किसी कार्रवाई का डर ही नहीं रह गया है। यही कारण है कि ग्रामीण अब सीधे तौर पर खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रेत माफियाओं पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो और नदी को बचाने के लिए तत्काल प्रभाव से अवैध खनन पर रोक लगाई जाए।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन रेत माफियाओं पर कब शिकंजा कसता है,या फिर अहिरन नदी इसी तरह अवैध उत्खनन की भेंट चढ़ती रहेगी।

और क्या रेत माफियाओं का धंधा यूं ही जारी रहेगा।

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