

NM भारत न्यूज (एजेंसी)
पोड़ी उपरोड़ा 06.08.2026 स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की छात्राओं ने अधीक्षिका को हटाने सहित विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर कटघोरा–अंबिकापुर नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अचानक हुए इस प्रदर्शन से हाईवे पर यातायात बाधित हो गया और मौके पर प्रशासनिक अमला पहुंचा।
छात्राओं का आरोप है कि छात्रावास में लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है। भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई, सहित अधीक्षिका की आधी रात को पूजा पाठ करना ,बच्चो से मालिश करवाना मना करने पर बच्चों को हास्टल से निकाल देने की खुले आम धमकी देना और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर लगातार कई शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। छात्राओं ने यह भी कहा कि कई बार लिखित और मौखिक रूप से शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं को अनसुना किया गया।
छात्राओं ने बताया कि छात्रावास में व्याप्त समस्याओं की जानकारी पहले ही बीईओ को दी गई थी। उनका कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदार विकास खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा गंभीरता से कार्रवाई की जाती, तो आज उन्हें मजबूर होकर सड़क पर उतरकर आंदोलन नहीं करना पड़ता।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं कि छात्राओं को अपनी आवाज उठाने के लिए नेशनल हाईवे पर चक्काजाम करना पड़ा? यदि छात्रावास में शासन के निर्धारित मानकों के अनुरूप सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो फिर लगातार शिकायतों और विरोध की स्थिति क्यों उत्पन्न हो रही है? क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा छात्राओं की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया?
एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठ रहा है कि जिला प्रशासन द्वारा सक्षम अधिकारी के बिना अनुमति मीडिया के छात्रावास में प्रवेश पर रोक लगाने का आदेश पारदर्शिता पर कितना प्रभाव डालता है। यदि छात्राएं सड़क पर उतरकर विरोध नहीं करतीं, तो छात्रावास के भीतर की वास्तविक स्थिति और समस्याएं सामने कैसे आतीं?
घटना की जानकारी मिलते ही बीईओ, तहसीलदार सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्राओं को समझाइश देकर चक्काजाम समाप्त किया गया। अधिकारियों द्वारा छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुनने और समाधान का आश्वासन दिया गया है।
गौरतलब है कि इसी छात्रावास से जुड़े मामलों को लेकर पूर्व में भी समाचार प्रकाशित हो चुके हैं। अब छात्राओं के इस खुले विरोध के बाद छात्रावास की व्यवस्थाओं, शिकायत निवारण प्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
यह मामला केवल एक छात्रावास की समस्या तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि यह पूरे जिले के छात्रावासों की व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। आवश्यकता इस बात की है कि सभी छात्रावासों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि छात्राओं को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं और उनके सभी अधिकार समय पर उपलब्ध हो रहे हैं या नहीं।
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की आगे की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।




