कोरबाछत्तीसगढ़

पोड़ी उपरोड़ा में शिक्षा व्यवस्था पर फिर बड़ा सवाल! 3:30 बजे ही स्कूल में लगा ताला, शिक्षक चले गए घर… बारिश में सड़क किनारे खड़े रहे मासूम बच्चे

 

NM भारत न्यूज (एजेंसी)

पोड़ी उपरोड़ा।06.08.2026

कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला तिलाई डांड़, संकुल कारीमाटी से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक और मामला सामने आया है।

विद्यालय के शिक्षक अर्जुन मरावी ने निर्धारित समय से पहले ही लगभग 3:30 बजे स्कूल बंद कर दिया और स्वयं घर के लिए रवाना हो गए, जबकि छोटे-छोटे बच्चे विद्यालय के बाहर खड़े होकर बारिश थमने का इंतजार करते रहे।

बतादें कि उस समय तेज बारिश हो रही थी। बच्चे भीगते हुए विद्यालय के बाहर खड़े रहे, लेकिन उनकी सुरक्षा और घर पहुंचने की व्यवस्था सुनिश्चित करने वाला कोई जिम्मेदार मौके पर मौजूद नहीं था। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब विद्यालय बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है।

सबसे गंभीर बात यह है कि शासकीय प्राथमिक शाला तिलाई डांड़ मुख्य मार्ग पर स्थित है, जहां से घर जाने के लिए कई बच्चों को व्यस्त मुख्य सड़क पार करनी पड़ती है। बारिश, फिसलन और सड़क पर वाहनों की आवाजाही के बीच बच्चों को अकेले छोड़ देना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा माना जा रहा है।

प्रा. शाला तिलाई डांड़ में दो शिक्षक हैं जिसमें एक शिक्षक नागेन्द्र सिंह अवकाश में थे।

यह सही है कि कई बार खराब मौसम या विशेष परिस्थितियों में विद्यालय की छुट्टी के समय में परिवर्तन किया जा सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में विद्यालय प्रबंधन की पहली जिम्मेदारी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है। यदि बच्चों को सुरक्षित उनके अभिभावकों के साथ भेजने की व्यवस्था नहीं है, तो उन्हें विद्यालय परिसर में सुरक्षित रखा जाना चाहिए। ऐसे में बच्चों को बारिश में बाहर छोड़कर शिक्षक का चले जाना गंभीर लापरवाही का विषय बन गया है।

गौरतलब है कि पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार एक के बाद एक गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन अब तक BEO के.आर.दयाल के द्वारा कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिल रहा है। ना ही कार्रवाई को सार्वजनिक किया जा रहा है?

कभी शिक्षक बिना सूचना के अनुपस्थित मिलते हैं, कभी विद्यालय समय से पहले बंद होने की शिकायत आती है, तो कहीं बच्चों से काम कराने और अव्यवस्थाओं के आरोप सामने आते हैं। इन घटनाओं ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब उठ रहे हैं बड़े सवाल…

विद्यालय निर्धारित समय से पहले बंद क्यों किया गया?

क्या समय से पहले छुट्टी देने का कोई अधिकृत आदेश था?

बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना शिक्षक विद्यालय छोड़कर कैसे चले गए?

मुख्य मार्ग पार करने वाले मासूम बच्चों की जिम्मेदारी किसकी थी?

यदि इस दौरान कोई हादसा हो जाता, तो उसका जिम्मेदार कौन होता?

क्या शिक्षा विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करेगा?

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी भी है। यदि ऐसी लापरवाही पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।

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