कोरबाछत्तीसगढ़

पोड़ी उपरोड़ा: पनगवां पंचायत में मैदान समतलीय करण के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा पूर्व सरपंच एवं वर्तमान सचिव की मिलीभगत से शास. राशि का बंदर बाट का आरोप।

 

 

NM भारत न्यूज।

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा।

पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पनगवा में वर्ष 2023-24 में स्वीकृत खेल मैदान एवं मैदान समतलीकरण कार्य को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लगभग 10 लाख रुपये की स्वीकृत राशि से कराया गया कार्य केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है। मामले में पूर्व सरपंच एवं वर्तमान सचिव की मिलीभगत से शासकीय राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया जा रहा है।

 

10.00लाख का कार्य मैदान में कहीं भी दिखाई नहीं दे रही है।

 

जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत पनगवा में “प्राथमिक शाला छुरी डांड के पास खेल मैदान समतलीकरण” कार्य स्वीकृत किया गया था। यह कार्य “जिला योजना एवं सांख्यिकी संसद मद” के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 10 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत हुआ था। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर कार्य की स्थिति देखकर यह स्पष्ट नहीं होता कि यहां इतनी बड़ी राशि खर्च की गई होगी।

सूत्रों के अनुसार मैदान समतलीकरण के नाम पर केवल जेसीबी मशीन से लगभग 20 से 25 घंटे ही कार्य कराया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि मामूली मिट्टी समतल कर लाखों रुपये का भुगतान निकाल लिया गया। निर्माण स्थल पर न तो व्यापक कार्य दिखाई देता है और न ही ऐसा कोई स्थायी विकास कार्य नजर आता है जिससे 10 लाख रुपये खर्च होने की पुष्टि हो सके।

ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि बच्चों के खेल मैदान जैसे महत्वपूर्ण कार्य में भी भ्रष्टाचार किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए तो वास्तविक खर्च और कागजी भुगतान के बीच का अंतर आसानी से सामने आ सकता है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही भुगतान संबंधी दस्तावेज, मस्टर रोल, मशीन उपयोग और तकनीकी स्वीकृति की भी जांच की जाए। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

गांव के लोगों का कहना है कि शासन ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं के विकास के लिए लाखों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन यदि इसी तरह कागजों में कार्य दिखाकर राशि का बंदरबांट होता रहा तो योजनाओं का लाभ आम जनता तक कभी नहीं पहुंच पाएगा।

अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई हैं कि आखिर 10 लाख रुपये के इस कथित खेल मैदान घोटाले में क्या कार्रवाई होती है और जिम्मेदार लोगों पर कब तक शिकंजा कसा जाता है।

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