
N M भारत न्यूज (एजेंसी)
कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा। विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम तुमान-अमलडीहा क्षेत्र में निर्माणाधीन रेलवे साइडिंग एवं ब्रिज निर्माण कार्य को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में गहराता नजर आ रहा है। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि निर्माण कार्य में बड़ी मात्रा में अवैध रूप से उत्खनित रेत का उपयोग किया जा रहा है, जिसे आसपास के विभिन्न घाटों से लाकर झरझरिया कंपनी के निर्माण कार्यों में खपाया जा रहा है।
आसपास के घाटों से रेत सप्लाई होने का दावा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तुमान, अमलडीहा, बरबसपुर, पुटुवा एवं आसपास के अन्य घाटों से लगातार रेत का उत्खनन कर ट्रैक्टरों के माध्यम से निर्माण स्थल तक पहुंचाया जा रहा है।
ग्रामीणों का दावा है कि यह गतिविधि लंबे समय से जारी है और क्षेत्र के लोग प्रतिदिन इसे देख रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे साइडिंग और ब्रिज निर्माण में उपयोग हो रही रेत के स्रोत की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
मीडिया के सवाल पर मैनेजर ने किया इनकार
ग्रामीणों से शिकायत मिलने के बाद मीडिया द्वारा कंपनी के मैनेजर आदित्य अग्रवाल से इस संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया। मैनेजर ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी कंपनी में किसी भी प्रकार की अवैध रेत नहीं खरीदी जा रही है तथा जिन आपूर्तिकर्ताओं से रेत ली जा रही है, उनके पास आवश्यक रॉयल्टी दस्तावेज उपलब्ध हैं। लेकिन मैनेजर को ये मालूम नहीं कि यहां आसपास कोई रॉयल्टी जारी ही नहीं हुई है। तो फिर रॉयल्टी पेपर कहां से आया।
इस प्रकार सवाल उठाए जाने पर कि कटघोरा क्षेत्र के कई घाटों में वर्तमान में रॉयल्टी जारी नहीं होने की जानकारी सामने आई है,
ऐसे में रेत की आपूर्ति किस आधार पर हो रही है, इस पर संतोषजनक स्पष्टता नहीं मिल सकी।
ग्रामीणों का आरोप के साथ साथ प्रत्यक्ष रूप से साक्ष्य के आधार पर ट्रैक्टरों से रेत की अनलोडिंग होते देखी गई है और इसके संबंध में उनके पास तस्वीरें एवं अन्य प्रमाण भी मौजूद हैं।
दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही रेत पूरी तरह वैध स्रोतों से खरीदी गई है तो कंपनी और संबंधित विभागों को परिवहन पास, रॉयल्टी रसीद एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। अब ग्रामीणों का कहना है कि तुमान अमलडीहा, बरबसपुर पुटुवा के जितने घाट हैं कब से रॉयल्टी जारी हुई है।
राजस्व हानि की आशंका
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि यदि अवैध उत्खनन की रेत का उपयोग किया जा रहा है तो इससे शासन को राजस्व की हानि हो रही है। लोगों का सवाल है कि जब शासन द्वारा रेलवे परियोजना के लिए विधिवत टेंडर जारी किया गया है और कार्यों के लिए राशि भी स्वीकृत है, तो फिर अवैध स्रोतों से सामग्री उपयोग किए जाने के आरोप क्यों सामने आ रहे हैं।
खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल
मामले में खनिज विभाग की निष्क्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य संचालित होने के बावजूद अब तक कोई बड़ी जांच या कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे लोगों के मन में संदेह और गहरा होता जा रहा है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि यदि कोई आम व्यक्ति छोटी मात्रा में भी नियमों का उल्लंघन करता है तो तत्काल कार्रवाई की जाती है, लेकिन बड़े निर्माण कार्यों के मामले में विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
पर्यावरण पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी नदी या घाट से अनियंत्रित एवं भारी मात्रा में रेत उत्खनन स्थानीय पर्यावरण और नदी तंत्र को प्रभावित कर सकता है। इससे जलस्तर, जैव विविधता तथा प्राकृतिक संतुलन पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
मुख्य बिन्दु
रेत अवैध रूप खरीदी जा रही है और रॉयल्टी पेपर दूसरे स्थानों का बताया जा रहा है।
इस प्रकार गुमराह कर इतनी बड़ी कंपनी को संचालित की जा रही है।
राजस्व विभाग के साथ शासन को को भी चुना लगाया जा रहा है।




