

NM भारत न्यूज (एजेंसी)
कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा। कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरा में पंचायत व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत की बैठकों और ग्राम सभा जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में निर्वाचित सरपंच तुलसी बाई अक्सर अनुपस्थित रहती हैं, जबकि उनकी जगह सरपंच पति नेतृत्व करते दिखाई देते हैं। इसे लेकर ग्रामीणों ने पंचायत व्यवस्था और शासन के नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शासन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जिस जनप्रतिनिधि को जनता ने चुना है, वही अपने पद का कार्यभार संभाले और पंचायत संबंधी जिम्मेदारियों का निर्वहन करे, लेकिन ग्राम पंचायत सेमरा में स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम सभा में सरपंच की मौजूदगी बहुत कम देखने को मिलती है, जबकि पंचायत के निर्णयों और बैठकों में सरपंच पति की सक्रियता अधिक रहती है। इससे पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत की सबसे बड़ी और गंभीर समस्या पेयजल संकट है, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जा सकी है। गांव के कई मोहल्लों में पानी की भारी किल्लत बनी हुई है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कामकाज में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को दूर-दूर से पानी लाने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। गर्मी और उमस के बीच पानी की समस्या ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब ग्राम पंचायत का नेतृत्व सक्रिय और जवाबदेह नहीं होगा, तो गांव की मूलभूत समस्याओं का समाधान कैसे होगा। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि सरपंच स्वयं ग्राम सभा और पंचायत कार्यों में नियमित रूप से उपस्थित नहीं होंगी, तो ग्रामीणों की समस्याएं किसके सामने रखी जाएंगी और उनका निराकरण कैसे होगा। पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता का सीधा असर विकास कार्यों और आम जनता की सुविधाओं पर पड़ रहा है।
ग्राम पंचायत सेमरा के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत की कार्यप्रणाली की जांच कराई जाए, ग्राम सभा में निर्वाचित सरपंच की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा गांव में उत्पन्न पेयजल संकट का तत्काल समाधान कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में जवाबदेही तय किए बिना और पानी जैसी मूलभूत समस्या का निराकरण किए बिना गांव की स्थिति सुधरना मुश्किल है।
अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों की शिकायतों और पंचायत व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर जनपद पंचायत, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा जिला प्रशासन कितना गंभीर रुख अपनाता है, और ग्राम पंचायत सेमरा के ग्रामीणों को पानी संकट व पंचायत की निष्क्रियता से कब राहत मिलती है।




