

NM भारत न्यूज (एजेंसी)
पोड़ी उपरोड़ा। विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा की सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने यह संकेत दिया है कि कई विद्यालयों में अनुशासन और जवाबदेही की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन गई है। कहीं शिक्षक बिना अनुमति के विद्यालय से अनुपस्थित पाए जा रहे हैं, कहीं बच्चों को समय से पहले घर भेज दिया जाता है, कहीं विद्यार्थियों से विद्यालय के कार्य कराए जा रहे हैं और अब एक शिक्षक के शराब के नशे में विद्यालय तथा गांव में एक घर धुत्त नशे में सोए रहने का मामला भी सामने आया है। इन घटनाओं ने अभिभावकों और ग्रामीणों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है।
सबसे पहले सेमरा प्राथमिक शाला में शिक्षक सूरज कुजूर बिना किसी अवकाश आवेदन के विद्यालय से अनुपस्थित पाए गए। इस मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के.आर.दयाल के द्वारा केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इतने गंभीर मामले में केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त कार्रवाई नहीं माना जा सकता।
इसके बाद हाई स्कूल सर भोका एवं प्राथमिक शाला सरभोका का मामला सामने आया, जहां दोपहर लगभग 3:30 बजे ही बच्चों की छुट्टी कर दी गई। जब इस संबंध में भी शिक्षकों से जानकारी ली गई तो हाथी आने की बात कहकर कारण बताया गया। जब कि वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार उस समय क्षेत्र में हाथी की कोई मौजूदगी नहीं थी। इस मामले की जानकारी भी BEO कार्यालय तक पहुंचाई गई। बाद में सरपंच गुर बहार टोप्पो के अनुसार BEO सर विद्यालय पहुंचे और शिक्षकों से पूछताछ भी की।
लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। दो दिन बाद उसी विद्यालय के शिक्षक राजेश बंजारे के बारे में आरोप सामने आया है,कि वे शराब के नशे में विद्यालय न पहुंच कर गांव में ही नशे हालत में किसी सुने घर में धुत्त नशे में सोए हुए पाए गए। यह मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों के अनुसार प्राथमिक विद्यालय सरभोका के दोनों शिक्षक राजेश बंजारे और गोलन्त सोनवानी आए दिन शराब पीकर ही स्कूल आते हैं आखिर शिक्षा विभाग की ओर से कोई कार्रवाई अब तक क्यों नहीं?
ग्राम पंचायत सरभोका के सरपंच श्री गुरबहार टोप्पो का स्पष्ट कहना है कि इस तरह की शिकायतें 10 से 20 बार तक विभाग को दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद जब परिणाम नहीं मिलता तो शिकायत करने का भी मन नहीं करता। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
इधर 4 अगस्त 2026 को प्राथमिक विद्यालय लैंगा में भी एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई, जहां बच्चों को शौचालय की टंकी में पानी भरते हुए देखा गया। जब शिक्षकों से इस संबंध में जानकारी ली गई तो स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोलमोल बातें की गईं। इससे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या बच्चे विद्यालय पढ़ाई करने आते हैं या विद्यालय का काम करने?
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने पोड़ी उपरोड़ा शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं ?
यदि हर मामले में केवल समझाइश या कारण बताओ नोटिस देकर कार्रवाई सीमित कर दी जाती है, तो इससे अनुशासनहीनता पर अंकुश कैसे लगेगा? ग्रामीणों का कहना है कि जब तक दोषी शिक्षकों पर सख्त विभागीय कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि शिक्षक ही अपने दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी से नहीं करेंगे, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना कैसे पूरा होगा?
अब सभी की नजरें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर ठोस कार्रवाई की जाती है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।




