

NM भारत न्यूज।
कोरबा/पोड़ी-उपरोड़ा। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन विकासखंड पोड़ी-उपरोड़ा के ग्राम पंचायत सेमरा में यह योजना ग्रामीणों के लिए अब तक केवल कागजों और घोषणाओं तक सीमित नजर आ रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई पानी टंकी, बोर खनन और घर-घर बिछाई गई पाइप लाइन के बावजूद ग्रामीणों को आज तक एक बूंद पानी नसीब नहीं हो पाया है।
एक वर्ष बाद भी नहीं शुरू हुई जल आपूर्ति
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत सेमरा में नल-जल योजना के तहत पानी टंकी का निर्माण पूरा हो चुका है। बोरवेल भी खोदा गया और अधिकांश घरों तक पाइप लाइन एवं नल कनेक्शन लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद योजना का संचालन शुरू नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि लगभग एक वर्ष बीतने को है, लेकिन ग्रामीणों के घरों में आज तक नल से पानी नहीं आया।
महिलाओं की बढ़ी परेशानी,
आधा किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है पानी
गांव के बड़े पारा सहित कई मोहल्लों में पेयजल संकट गंभीर बना हुआ है। भीषण गर्मी और तपती धूप के बीच महिलाएं और युवतियां सिर पर घड़ा, बाल्टी और डिब्बा लेकर आधा किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तय कर पानी लाने को मजबूर हैं। प्रतिदिन कई चक्कर लगाकर किसी तरह घर की जरूरतें पूरी की जा रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में हालात और भी विकट हो जाते हैं। पानी की तलाश में घंटों समय खर्च करना पड़ता है, जिससे दैनिक कार्य भी प्रभावित होते हैं।
शादी-ब्याह और सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़ जाती है चिंता
गांव में जब भी शादी, बरहो या अन्य सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, तब सबसे बड़ी चिंता पानी की व्यवस्था को लेकर सामने आती है। ग्रामीणों के मुताबिक ऐसे अवसरों पर गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर से टैंकर या वाहनों के माध्यम से पानी मंगाना पड़ता है। अतिरिक्त खर्च उठाकर किसी तरह कार्यक्रम संपन्न कराए जाते हैं।
टूटने लगे नल और चबूतरे
ग्रामीणों ने बताया कि योजना शुरू होने से पहले ही कई स्थानों पर लगाए गए नल और उनके चबूतरे क्षतिग्रस्त होने लगे हैं। लंबे समय तक उपयोग नहीं होने और रखरखाव के अभाव में योजना के ढांचे पर भी असर दिखाई देने लगा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द जल आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो लाखों रुपये की लागत से तैयार की गई व्यवस्था बेकार साबित हो सकती है।
ग्रामीणों ने लगाए उपेक्षा के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि पेयजल समस्या को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। उनका कहना है कि वर्षों से वे पानी की समस्या झेल रहे हैं और आज भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में अंतर
सरकार द्वारा “हर घर नल, हर घर जल” का नारा दिया जा रहा है, लेकिन ग्राम पंचायत सेमरा की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। जहां एक ओर योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण एक-एक बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि
संबंधित विभाग और प्रशासन तत्काल योजना की जांच कर जल्द से जल्द जल आपूर्ति शुरू कराएं, ताकि उन्हें पेयजल संकट से राहत मिल सके और सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का वास्तविक लाभ गांव तक पहुंच सके।




