कोरबाछत्तीसगढ़

पोड़ी उपरोड़ा : 5 साल बाद भी नहीं मिला पूरा मुआवजा, रेल कॉरिडोर प्रभावित किसान दर-दर भटकने को मजबूर बनखेता के किसानों का फूटा आक्रोश, बोले – आश्वासन मिला, हक नहीं; अब होगा उग्र आंदोलन

 

NM भारत न्यूज  (एजेंसी)

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा। विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत बनखेता के दर्जनों किसान पिछले पांच वर्षों से अपनी अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। किसानों का आरोप है कि गेवरा-पेंड्रा रेल कॉरिडोर परियोजना के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित कर ली गई, लेकिन आज तक अधिकांश किसानों को पूरा मुआवजा नहीं मिल पाया है। किसी किसान को केवल पहली किस्त मिली है तो कई किसानों को अब तक एक रुपया भी प्राप्त नहीं हुआ है।

किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के समय प्रशासनिक अधिकारियों और रेलवे विभाग के प्रतिनिधियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि परियोजना कार्य में कोई बाधा न डालें, उनका पूरा मुआवजा जल्द दिया जाएगा। किसानों के अनुसार तत्कालीन एसडीएम द्वारा भी आश्वस्त किया गया था कि अन्य किसानों को दिए गए मुआवजे की तुलना में उन्हें बेहतर दर पर भुगतान किया जाएगा। इसी भरोसे में किसानों ने अपनी जमीन रेलवे परियोजना को सौंप दी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल सका।

जनदर्शन में भी लगाई गुहार, फिर भी नहीं हुई सुनवाई

पीड़ित किसानों ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर कलेक्टर कार्यालय कोरबा में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में भी आवेदन प्रस्तुत किया था। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई या समाधान सामने नहीं आया है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन केवल आश्वासन देता रहा, लेकिन उनकी समस्याओं के निराकरण की दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं की गई।

जमीन गई, रोजगार भी छिना

किसानों का कहना है कि वे वर्षों से खेती-किसानी और मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। रेलवे परियोजना के लिए उनकी कृषि भूमि अधिग्रहित कर ली गई, जिससे उनकी आजीविका का मुख्य साधन समाप्त हो गया। अब न तो उनके पास खेती के लिए पर्याप्त जमीन बची है और न ही मुआवजे की राशि मिली है, जिससे वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

किसानों की चेतावनी – अब होगा उग्र आंदोलन

लगातार उपेक्षा और लंबित मुआवजा भुगतान से नाराज किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और बकाया मुआवजा भुगतान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। किसानों का कहना है कि अब आश्वासनों पर भरोसा नहीं रहा और अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए वे लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा आंदोलन करेंगे।

मुख्य मांगें

🔹 अधिग्रहित भूमि का पूरा मुआवजा तत्काल भुगतान किया जाए।

🔹 लंबित मामलों की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

🔹 प्रभावित किसानों को आर्थिक राहत एवं पुनर्वास की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

🔹 रेल कॉरिडोर परियोजना से प्रभावित सभी किसानों की समस्याओं का शीघ्र निराकरण किया जाए।

अब देखना होगा कि किसानों की वर्षों पुरानी इस पीड़ा पर प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है और प्रभावित परिवारों को उनका न्यायसंगत अधिकार कब मिलता है।

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