

NM भारत न्यूज (एजेंसी)
पोड़ी उपरोड़ा।
पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड स्थित बागों डेम में शासन के स्पष्ट प्रतिबंधों और नियमों के बावजूद अवैध रूप से मछली पकड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरभोका, रिगनिया और एतमा नगर क्षेत्र के आसपास डेम में खुलेआम जाल डालकर मछलियों का शिकार किए जाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हालात ऐसे हैं कि प्रतिबंध केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रहे हैं, जबकि धरातल पर नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन सुबह और शाम डेम के विभिन्न हिस्सों में कई लोग नावों तथा किनारों से जाल डालकर बड़ी मात्रा में मछलियां पकड़ते देखे जाते हैं। यह गतिविधि लंबे समय से जारी है, लेकिन संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से अवैध मछली पकड़ने वालों के हौसले बुलंद हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे मामले की जानकारी मत्स्य विभाग एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को होने के बावजूद अब तक न तो नियमित निगरानी बढ़ाई गई है और न ही किसी प्रकार की कठोर कार्रवाई देखने को मिली है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो बागों डेम की मत्स्य संपदा को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी जलाशय में अनियंत्रित और अवैध तरीके से मछलियों का शिकार जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। लगातार हो रहे अवैध शिकार से मछलियों के प्रजनन चक्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे भविष्य में जलाशय में मछलियों की संख्या तेजी से घट सकती है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि बागों डेम केवल जल संग्रहण का स्रोत नहीं, बल्कि क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर भी है। यदि इसी तरह नियमों की अनदेखी होती रही तो भविष्य में मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की आजीविका पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इससे शासन को राजस्व हानि होने के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन भी प्रभावित होगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सरभोका, रिगनिया और एतमा नगर क्षेत्र में अवैध रूप से मछली पकड़ने वालों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही डेम क्षेत्र में नियमित गश्त, निगरानी और शासन के प्रतिबंधों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि बागों डेम की प्राकृतिक एवं मत्स्य संपदा को संरक्षित रखा जा सके।
अब बड़ा सवाल…
प्रतिबंध के बावजूद यदि बागों डेम में खुलेआम अवैध मछली शिकार जारी है, तो आखिर जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था कहां है? क्या इस खबर के बाद प्रशासन ठोस कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।




