

NM भारत न्यूज (एजेंसी)
कटघोरा/चैतमा। प्रदेश सरकार जहां “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर रही है, वहीं दूसरी ओर कटघोरा वन मंडल के वन परिक्षेत्र चैतमा अंतर्गत ग्राम तेलसरा में सड़क किनारे खड़े लगभग 8 से 10 वर्षों पुराने बड़े पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने से वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस समय पूरे प्रदेश में पेड़ों को बचाने और नए पौधे लगाने का संदेश दिया जा रहा है, उसी समय वन क्षेत्र में ही बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई होना कई सवालों को जन्म देता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ दिन पूर्व सड़क किनारे लगे बड़े-बड़े पेड़ों को काट दिया गया। इतना ही नहीं, आसपास मौजूद कई छोटे पौधे भी नष्ट कर दिए गए। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा क्षेत्र वन विभाग की निगरानी में आता है। इसके बावजूद इतनी बड़ी घटना हो जाना यह दर्शाता है कि या तो निगरानी व्यवस्था कमजोर है अथवा जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई।
उल्लेखनीय है कि तेलसरा सर्किल डिप्टी रेंजर कोराम जी के कार्य क्षेत्र में आता है जो उनकी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है
वर्षों पुराने वृक्ष किसी भी क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर होते हैं। एक पेड़ को विशाल बनने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन उसे काटने में कुछ ही घंटे पर्याप्त होते हैं। ऐसे में यदि परिपक्व वृक्षों की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो केवल पौधारोपण अभियान चलाने से पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि नए पौधे लगाने के साथ-साथ पहले से मौजूद पेड़ों का संरक्षण सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वन विभाग को इस कटाई की जानकारी थी? यदि जानकारी थी तो दोषियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई? और यदि जानकारी नहीं थी, तो यह विभाग की गश्त, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। सड़क किनारे खुलेआम पेड़ों की कटाई होना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं निगरानी व्यवस्था में कमी रही है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि समय रहते प्रभावी निगरानी और कार्रवाई होती, तो इतने बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई रोकी जा सकती थी। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर पौधारोपण अभियान चला रही है, लेकिन यदि वन क्षेत्रों में ही पेड़ों की सुरक्षा नहीं हो सकेगी, तो ऐसे प्रयासों की प्रभाव शीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब सबकी निगाहें वन विभाग पर
अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद वन विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या विभाग मौके पर जांच कर दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह केवल जांच तक सीमित रह जाएगा? इसका जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।




