कोरबाछत्तीसगढ़

कटघोरा तहसील में रिश्वतखोरी पर बड़ी कार्रवाई नकल जारी करने के एवज में अवैध राशि मांगने की शिकायत पर सहायक ग्रेड-02 मंजू कृष्णा धिरही निलंबित कलेक्टर कुणाल दुदावत की सख्त कार्रवाई, जांच पूरी होने तक पोंड़ीउपरोड़ा तहसील कार्यालय रहेगा मुख्यालय

 

NM भारत न्यूज (एजेंसी)

कोरबा, 22 जून 2026।

कोरबा जिले में शासकीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। तहसील कार्यालय कटघोरा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 श्रीमती मंजू कृष्णा धिरही को रिश्वत मांगने की शिकायत सही पाए जाने के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री कुणाल दुदावत द्वारा की गई यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि आम नागरिकों से अवैध वसूली, भ्रष्ट आचरण और शासकीय कार्यों में अनियमितता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रशासनिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कटघोरा तहसील कार्यालय में नकल जारी करने के एवज में आवेदक श्री किशन कुमार से अवैध राशि की मांग किए जाने की शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं दण्डाधिकारी कटघोरा के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। शिकायत केवल मौखिक आरोप तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसके समर्थन में वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई गई, जिसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की गई और प्रस्तुत तथ्यों व साक्ष्यों का परीक्षण किया गया।

जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा ने संबंधित कर्मचारी श्रीमती मंजू कृष्णा धिरही के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की अनुशंसा करते हुए विस्तृत प्रतिवेदन जिला प्रशासन को भेजा। प्रतिवेदन के परीक्षण के बाद कलेक्टर कोरबा ने प्रथम दृष्टया यह पाया कि संबंधित कर्मचारी का आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के विपरीत है, जो शासकीय सेवकों से ईमानदारी, शुचिता और कर्तव्यनिष्ठा की अपेक्षा करता है।

इसी आधार पर कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत कार्रवाई करते हुए श्रीमती मंजू कृष्णा धिरही, सहायक ग्रेड-02, तहसील कार्यालय कटघोरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पोंड़ीउपरोड़ा निर्धारित किया गया है। नियमानुसार उन्हें इस अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।

यह कार्रवाई सिर्फ एक कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कदम भर नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे जिला प्रशासन की उस सख्त नीति के रूप में देखा जा रहा है जिसके तहत भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और जनसुविधाओं के बदले रिश्वतखोरी को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाया जा रहा है। तहसील, राजस्व और अन्य शासकीय कार्यालयों में आम लोगों को सेवा उपलब्ध कराने के नाम पर यदि किसी भी स्तर पर पैसों की मांग की जाती है, तो ऐसे मामलों में अब सीधे कठोर कार्रवाई की जा रही है।

जिला प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि शासकीय कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्ट आचरण अथवा आम नागरिकों से अवैध वसूली की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितैषी प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।

इस कार्रवाई से जिले के अन्य शासकीय कार्यालयों में भी स्पष्ट संदेश गया है कि जनता से जुड़े कार्यों में लापरवाही, मनमानी, रिश्वतखोरी या पद का दुरुपयोग अब छिप नहीं सकेगा। कलेक्टर की इस सख्त कार्रवाई को आम नागरिकों के हितों की रक्षा और सरकारी तंत्र में विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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