कोरबाछत्तीसगढ़

पोड़ी उपरोड़ा में शिक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल! कहीं शिक्षक नदारद, तो कहीं हाथियों के नाम पर समय से पहले छुट्टी; आखिर जिम्मेदार कौन?

NM भारत न्यूज (एजेंसी)

कोरबा//पोड़ी उपरोड़ा

पोड़ी उपरोड़ा में शिक्षा व्यवस्था बदहाल! कहीं शिक्षक नदारद तो कहीं समय से पहले छुट्टी, जिम्मेदारों पर उठे सवाल

पोड़ी उपरोड़ा। विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा की सरकारी शिक्षा व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। एक ओर शिक्षक बिना स्वीकृत अवकाश के कई दिनों तक विद्यालय से गायब मिल रहे हैं, तो दूसरी ओर शासन द्वारा निर्धारित समय से पहले विद्यार्थियों की छुट्टी किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, विद्यालयों की निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

हाल ही में ग्राम पंचायत सेमरा के प्राथमिक शाला कटेलपारा में पदस्थ सहायक शिक्षक संतोष कुजूर बिना स्वीकृत अवकाश के कई दिनों तक अनुपस्थित पाए गए थे। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था। उम्मीद थी कि इस कार्रवाई के बाद विद्यालयों में अनुशासन मजबूत होगा, लेकिन इसके बावजूद हालात में कोई खास सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

इसी बीच बुधवार को सरभोका हाई स्कूल एवं प्राथमिक शाला में विद्यार्थियों की करीब दोपहर 3:30 बजे ही छुट्टी कर दी गई, जबकि शासन द्वारा निर्धारित समय के अनुसार विद्यालय का संचालन शाम 4:00 बजे तक होना चाहिए। समय से पहले छुट्टी होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है और अभिभावकों में भी नाराजगी देखी जा रही है।

जब प्राथमिक शाला के एक शिक्षक से समय से पहले छुट्टी देने का कारण पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों की आशंका को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए छुट्टी पहले कर दी गई। शिक्षक ने यह भी कहा कि हाई स्कूल की छुट्टी भी पहले हो गई थी, इसलिए सभी बच्चों को एक साथ घर भेजने का निर्णय लिया गया। उनका कहना था कि कई विद्यार्थी 4 से 5 किलोमीटर दूर जंगल और झाड़ियों वाले रास्तों से अपने गांव लौटते हैं, इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया।

हालांकि, इस मामले का दूसरा पक्ष भी सामने आता है। स्थानीय स्तर पर वन विभाग की ओर से हाथियों की मौजूदगी या किसी आधिकारिक अलर्ट की पुष्टि की जानकारी नहीं मिली है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि वन विभाग की ओर से कोई चेतावनी जारी नहीं की गई थी, तो समय से पहले छुट्टी किस आधार पर की गई? क्या इसके लिए शिक्षा विभाग के सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई थी, या यह निर्णय केवल विद्यालय स्तर पर ही लिया गया?

यदि वास्तव में हाथियों का खतरा था, तो बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन यदि कोई आधिकारिक सूचना नहीं थी, तो बिना स्पष्ट प्रशासनिक निर्देश के निर्धारित समय से पहले छुट्टी करना भी सवालों के घेरे में आता है। ऐसे मामलों में तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

लगातार सामने आ रही घटनाओं से यह भी प्रतीत होता है कि विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग और निरीक्षण में कमी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रभावी निरीक्षण के अभाव में कुछ विद्यालयों में मनमानी की स्थिति बन रही है। इसके चलते विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के.आर. दयाल के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने मांग की है कि विकासखंड के सभी विद्यालयों का नियमित निरीक्षण कराया जाए। बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों तथा बिना सक्षम आदेश के समय से पहले छुट्टी कराने के मामलों की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही यदि वन्यजीवों की वास्तविक गतिविधियों के कारण विद्यालय समय में बदलाव आवश्यक हो, तो इसके लिए वन विभाग और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय बनाकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा और पढ़ाई—दोनों प्रभावित न हों।

बड़े सवाल

क्या बिना आधिकारिक सूचना के विद्यालय का समय बदला जा सकता है?

यदि हाथियों का खतरा था, तो वन विभाग की ओर से कोई अलर्ट क्यों नहीं था?

क्या शिक्षा विभाग ने समय से पहले छुट्टी की अनुमति दी थी?

विकासखंड में विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग आखिर कब होगी?

 

अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है या फिर शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल यूं ही बने रहते हैं।

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